ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने निगमीकरण को नकारा, 99.51% ने चुनी केंद्र सरकार की नौकरी
कानपुर की पांचों आयुध निर्माणियों में कर्मचारियों का रुख
उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित पांच ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में भी कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने को प्राथमिकता दी है। इनमें ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर (ओएफसी), स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ), फील्ड गन फैक्ट्री (एफजीके), ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री (ओईएफ) और ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ) शामिल हैं। इन इकाइयों में करीब आठ हजार कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं।
फेडरेशन के अनुसार, फील्ड गन फैक्ट्री में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुना है। संगठन ने कर्मचारियों के इस रुख को निगमीकरण की नीति के प्रति अविश्वास और लंबे संघर्ष के दौरान दिखाई गई एकजुटता का परिणाम बताया है।
केंद्र सरकार ने सात रक्षा सार्वजनिक उपक्रम बनाए थे
दरअसल, केंद्र सरकार ने पूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण करके सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का गठन किया था। एआईडीईएफ ने सरकार के इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
फेडरेशन के मुताबिक, अदालत में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद 15 जून 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। इसके तहत कर्मचारियों को केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने या संबंधित रक्षा सार्वजनिक उपक्रम में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प दिया गया था। विकल्प चुनने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई थी।
निगमीकरण के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग
एआईडीईएफ ने केंद्र सरकार से कर्मचारियों की भावना का सम्मान करते हुए निगमीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन चाहता है कि पर्याप्त अधिकारों और बजटीय सहायता के साथ आयुध निर्माणी बोर्ड को दोबारा सरकारी विभाग के रूप में स्थापित किया जाए।
इसके अलावा, फेडरेशन ने अनुकंपा नियुक्तियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने और रक्षा सिविल कर्मचारियों की लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की अपील भी की है।
कर्मचारियों की इच्छा के खिलाफ लागू हुआ निगमीकरण: एआईडीईएफ
एआईडीईएफ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सौरभ सिंह चौहान ने कहा कि कर्मचारियों की इच्छा के विपरीत निगमीकरण लागू किया गया था। उनके मुताबिक, अधिकारी और कर्मचारी निगमीकरण के तहत सेवा नहीं करना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि करीब 99.50 प्रतिशत कर्मचारियों ने निगमीकरण को नकारते हुए केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुना है। उन्होंने यह भी कहा कि कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री समेत तीन फैक्ट्रियों में सभी कर्मचारियों ने निगमीकरण के विकल्प को अस्वीकार किया है।

