झारखंड

झारखंड DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, अवैध घोषित करने की मांग; जानें क्या है विवाद

रांची: झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत से उनकी नियुक्ति को अवैध घोषित करने की मांग की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उल्लेख के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को बाबूलाल मरांडी की याचिका के साथ केंद्र की अर्जी पर भी सुनवाई करेगा।

केंद्र ने नियमावली में संशोधन पर उठाए सवाल

केंद्र सरकार का कहना है कि झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़ी 2025 की राज्य नियमावली सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए बाध्यकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने खास तौर पर 30 दिसंबर 2025 को किए गए उस संशोधन पर आपत्ति जताई है, जिसमें तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले छह महीने की अनिवार्य सेवा की शर्त हटा दी गई थी।

केंद्र ने पूर्व में अनुराग गुप्ता की नियुक्ति का विरोध किए जाने का भी हवाला दिया है। केंद्र की मांग है कि डीजीपी नियुक्ति के लिए नई प्रक्रिया शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 13 मार्च 2019 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि छह महीने की सेवा वाली शर्त यूपीएससी की ओर से सिफारिश किए जाने और पैनल तैयार किए जाने के समय लागू होगी।

ओडिशा में डीजीपी चयन को लेकर भी हुई थी सुनवाई

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ओडिशा सरकार की ओर से डीजीपी पद के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था। 24 सितंबर को पीठ ने ओडिशा सरकार से पूछा था कि क्या डीजीपी पद के लिए विचार किए जा रहे अधिकारियों की सूची से हटाए गए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को आरोपी की श्रेणी में रखा गया है। सीबीआई ने कहा था कि भर्ती परीक्षा घोटाला मामले में उनसे पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड और ओडिशा की प्रक्रिया पर जताई चिंता

फैसला सुरक्षित रखते समय प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि पीठ यह देखेगी कि ओडिशा और झारखंड में डीजीपी की नियुक्तियां प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार हुई हैं या नहीं।

प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि राज्य नियुक्ति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं और प्रकाश सिंह मामले में दिए गए फैसले का पालन नहीं करना चाहते। अदालत ने यह भी कहा था कि राज्य अपनी पसंद का डीजीपी चाहते हैं।

यूपीएससी के रवैये पर भी सुप्रीम कोर्ट नाराज

शीर्ष अदालत ने डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई थी। अदालत के अनुसार, राज्यों की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में शामिल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नाम छांटकर डीजीपी नियुक्ति के लिए देने की जिम्मेदारी यूपीएससी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के रवैये को इस प्रक्रिया में लापरवाही भरा बताया था।