हरियाणा

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर अनिल विज का बड़ा बयान, बोले- 5-6 दिन में दाखिल करेंगे अपील, हड़ताल का कोई मतलब नहीं

चंडीगढ़: हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं और कर्मचारियों की हड़ताल का फिलहाल कोई औचित्य नहीं है। विज ने स्पष्ट किया कि हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के फैसले के खिलाफ सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील दाखिल करने की तैयारी कर रही है। उनका प्रयास है कि अगले 5-6 दिनों में अपील दायर कर फैसले पर रोक हासिल करने की दिशा में कदम उठाया जाए।

निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का सरकार ने किया विरोध

अनिल विज ने कहा कि हरियाणा बिजली विनियामक आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस देने का आदेश दिया है। सरकार ने आयोग के समक्ष वरिष्ठ वकील के माध्यम से इस फैसले का मजबूती से विरोध किया था और विभाग ने भी अपनी ओर से पूरी कोशिश की।

ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, बिजली विनियामक आयोग एक स्वायत्त संस्था है। सरकार ने निजीकरण के लिए कोई आवेदन आमंत्रित नहीं किया था, लेकिन केंद्रीय कानून में ऐसा प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी बिजली वितरण के लिए आवेदन कर सकती है। आयोग ने इसी प्रक्रिया के तहत फैसला सुनाया, जो सरकार के पक्ष में नहीं आया।

‘मैं खुद निजीकरण के पक्ष में नहीं हूं’

अनिल विज ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से बिजली के निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि बिजली व्यवस्था पर सरकार का काफी पैसा और ढांचा लगा हुआ है। इसके अलावा कर्मचारियों की नौकरी का सवाल भी महत्वपूर्ण है। इसी कारण सरकार ने निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध किया।

उन्होंने बताया कि अब आयोग के आदेश को चुनौती देने के लिए विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द इस फैसले पर रोक मिल सके।

‘हड़ताल करना तब बनता, जब हम अपील नहीं करते’

बिजली कर्मचारियों से अपील करते हुए विज ने कहा कि हड़ताल का रास्ता अपनाने के बजाय उन्हें सरकार के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपील दायर करने के लिए 45 दिन का समय उपलब्ध है, लेकिन सरकार के अधिकारी जल्द कार्रवाई करने में जुटे हैं और 5-6 दिनों के भीतर अपील दाखिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

विज ने कर्मचारी नेताओं को यह भी प्रस्ताव दिया कि वे मामले की तैयारी में सरकार के वकील को सुझाव दे सकते हैं। यदि कर्मचारी अपना वकील नियुक्त करना चाहते हैं या किसी अन्य वकील का नाम सुझाना चाहते हैं, तो सरकार उस पर भी विचार करने को तैयार है।

‘लड़ाई अदालत में ही लड़नी पड़ेगी’

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिजली विनियामक आयोग के आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई अदालत में ही लड़ी जा सकती है। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की, जो यह सवाल उठा रहे हैं कि सरकार ने ही निजी कंपनी को बिजली वितरण की अनुमति दी और अब वही अपील करने जा रही है।

विज के मुताबिक, इस मामले में फैसला सरकार ने नहीं, बल्कि एक स्वायत्त विनियामक संस्था ने लिया है। उन्होंने कहा कि मामले पर टिप्पणी करने वालों को संबंधित केंद्रीय कानून को समझना चाहिए।

राहुल गांधी को आरएसएस की शाखा में जाने की दी सलाह

इस दौरान अनिल विज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले भी इस तरह की बातें कर चुके हैं, लेकिन उन्हें पहले यह समझना चाहिए कि आरएसएस क्या है और वहां क्या सिखाया जाता है।

विज ने कहा कि यदि राहुल गांधी आरएसएस को समझना चाहते हैं, तो उन्हें कुछ दिन उसकी शाखा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब राहुल गांधी ने स्वयं वहां जाकर गतिविधियों को नहीं देखा है, तो उन्हें संगठन के बारे में पूरी जानकारी कैसे हो सकती है।

छुआछूत के मुद्दे पर भी रखी अपनी बात

छुआछूत से जुड़े सवाल पर अनिल विज ने कहा कि अब यह पुरानी बात हो गई है। उन्होंने कहा कि सभी लोग भारतीय बनकर जी रहे हैं और उन्हें इसी भावना के साथ रहना चाहिए।