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यूपी में महिलाओं को फोन या सोशल मीडिया पर परेशान किया तो होगी कार्रवाई, 1090 पर दर्ज कराएं शिकायत

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में महिलाओं और युवतियों को फोन कॉल, सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से परेशान किए जाने की शिकायतों पर मदद के लिए वुमन पावर लाइन-1090 की सुविधा उपलब्ध है। इसके जरिए पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। इस हेल्पलाइन का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना, उनकी पहचान गोपनीय रखना और उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

अगर कोई व्यक्ति बार-बार फोन करके परेशान करता है, सोशल मीडिया पर पीछा करता है या किसी अन्य तरीके से प्रताड़ित करता है, तो महिला 1090 पर संपर्क कर सकती है। कई मामलों में शिकायतकर्ता को शुरुआत में सीधे पुलिस थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती। शिकायत मिलने के बाद पुलिस संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर उसे ऐसी गतिविधियां बंद करने की चेतावनी दे सकती है।

इसके अलावा, मानसिक तनाव या अवसाद से जूझ रही महिलाओं को काउंसलिंग के माध्यम से भावनात्मक सहयोग देने की व्यवस्था भी बताई गई है। इसका मकसद पीड़िताओं की समस्याओं को समझना और उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना है।

रोजाना हजारों कॉल संभालने का दावा

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 150 सीटों की क्षमता वाले 1090 कॉल सेंटर में रोजाना करीब 8,000 इनकमिंग और 10,000 आउटगोइंग कॉल संभाले जाते हैं। इसकी प्रक्रिया शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके निस्तारण और पीड़िता से फीडबैक लेने तक चलती है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस का प्रतिनिधि आरोपी से फोन पर संपर्क कर उसे चेतावनी दे सकता है और परेशान करने वाली गतिविधियां रोकने के लिए कह सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर हस्तक्षेप कर पीड़िता को राहत दिलाना है।

1090 पर शिकायत करने के बाद क्या होता है?

वुमन पावर लाइन पर शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की प्रकृति के अनुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। शुरुआत में आरोपी को फोन के जरिए चेतावनी देकर उत्पीड़न रोकने के लिए कहा जा सकता है। इसके बाद शिकायतकर्ता से यह जानने की कोशिश की जाती है कि उसकी परेशानी दूर हुई है या नहीं।

यदि शिकायत के बाद भी उत्पीड़न जारी रहता है, तो मामले को आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ाया जा सकता है। शिकायत के अलग-अलग चरणों में पीड़िता से फीडबैक लेने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसे वास्तव में राहत मिली है या नहीं।

चेतावनी के बाद भी उत्पीड़न जारी रहा तो थाने तक पहुंचेगा मामला

अगर चेतावनी देने के बाद भी आरोपी अपनी हरकतें बंद नहीं करता, तो एफएफआर यानी फैमिली, फ्रेंड्स एंड रिलेटिव्स तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके तहत आरोपी के परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क कर उसे व्यवहार बदलने और उत्पीड़न रोकने के लिए समझाने का प्रयास किया जाता है।

यदि इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता, तो मामला संबंधित पुलिस थाने को भेजा जा सकता है। इसके बाद मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

शिकायत के 30 दिन बाद भी लिया जाता है फीडबैक

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत के निस्तारण के 30 दिन बाद भी पीड़िता से अंतिम फीडबैक लेने की व्यवस्था है। यदि महिला बताती है कि उत्पीड़न की समस्या अब भी बनी हुई है या वह कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो मामले पर दोबारा ध्यान देकर समाधान की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन का प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, पीड़िताओं की निजता सुरक्षित रखी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी सहायता भी मिले। फोन या सोशल मीडिया के जरिए परेशान किए जाने की स्थिति में महिलाएं 1090 पर संपर्क कर मदद मांग सकती हैं।