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UP में सरकारी नौकरी पाना होगा मुश्किल! चरित्र सत्यापन के नियम सख्त, इन मामलों में नहीं मिलेगी नियुक्ति

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था बदलने की वकालत करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया है। प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद 28 अक्टूबर को संशोधित नियम जारी किए। ये सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों और शहरी व ग्रामीण स्थानीय निकायों में लागू होंगे।

आदेश के अनुसार, ऐसे किसी संगठन का सदस्य पाया गया उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा, जिसका उद्देश्य हिंसक तरीकों से स्थापित व्यवस्था को बदलना है। हालांकि, किसी खास राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं बनेगा। इसके अलावा हत्या, डकैती, बलात्कार, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, भ्रष्टाचार और आतंकवादी गतिविधियों जैसे गंभीर अपराधों में शामिल उम्मीदवारों को भी सरकारी नौकरी से दूर रखने का प्रावधान किया गया है। भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने या उन्हें हल कराने वाले संगठित गिरोह चलाने वालों पर भी यह रोक लागू होगी।

नए दिशा-निर्देशों में हिंसक गतिविधियों से जुड़े उम्मीदवारों के लिए तीन साल की अवधि का प्रावधान रखा गया है। यदि कोई उम्मीदवार 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन की तारीख से पिछले तीन वर्षों के दौरान हिंसक गतिविधियों या हिंसक तरीके से स्थापित व्यवस्था बदलने से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहा है, तो यह माना जा सकता है कि वह अब भी ऐसी गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, उम्मीदवार के आचरण और सोच में वास्तविक सकारात्मक बदलाव के दस्तावेजी प्रमाण मिलने पर उन पर विचार किया जा सकेगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल प्राथमिकी दर्ज होने या पुलिस जांच लंबित रहने के आधार पर किसी उम्मीदवार को स्वत: अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। जिन मामलों में उम्मीदवार बरी हो चुका है, कानूनी तरीके से समझौता हो गया है या मामला किशोर न्याय अधिनियम के दायरे में आता है, उनमें भी अपने आप अयोग्यता लागू नहीं होगी।

चरित्र सत्यापन लंबित होने पर भी मिल सकेगी अस्थायी नियुक्ति

नए नियमों के तहत चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने में देरी होने पर नियुक्ति पत्र रोकना अनिवार्य नहीं होगा। नियुक्ति प्राधिकारी उम्मीदवार के स्वघोषणा पत्र और निर्धारित शपथपत्र के आधार पर उसे अस्थायी नियुक्ति दे सकते हैं। बाद में यदि उम्मीदवार की ओर से दी गई जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।

जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को चरित्र सत्यापन का अनुरोध मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। गृह विभाग इस समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने की निगरानी करेगा। हालांकि, सत्यापन के नाम पर उम्मीदवारों को पूछताछ के लिए घर बुलाने या पुलिस थाने में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

प्रतिकूल रिपोर्ट पर उम्मीदवार को मिलेगा पक्ष रखने का मौका

यदि चरित्र सत्यापन के दौरान उम्मीदवार के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट मिलती है, तो जिलाधिकारी अंतिम सिफारिश भेजने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। उम्मीदवार व्यक्तिगत रूप से या ऑनलाइन अपना पक्ष रख सकेगा।

वहीं, पहले से कार्यरत राज्य कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उनके पुराने विभागों से सेवा से जुड़े जरूरी अभिलेख मंगाए जा सकेंगे।