CG-RERA की सख्ती: अधूरी और अपंजीकृत परियोजना पर प्रमोटर को झटका, आबंटी को 6.87 लाख रुपये ब्याज देने का आदेश
2019 से अक्टूबर 2026 तक के ब्याज का भुगतान करना होगा
प्राधिकरण की सुनवाई में सामने आया कि परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुसार विकास कार्य पूरे नहीं किए गए थे। इसके साथ ही सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए CG-RERA ने परियोजना को अपूर्ण और चालू श्रेणी में मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत विलंब के लिए ब्याज देने का आदेश पारित किया।
आदेश के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपये का भुगतान करना होगा।
इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक प्रमोटर को आबंटी को हर महीने 7,314 रुपये देने होंगे।
बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर अलग मामला दर्ज होगा
CG-RERA ने परियोजना का अनिवार्य पंजीयन नहीं कराने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के तहत निर्धारित पात्रता वाली परियोजनाओं का रेरा में पंजीयन कराना आवश्यक है।
नियमों का पालन नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर के खिलाफ अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत अलग प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रावधान के तहत बिना आवश्यक पंजीयन परियोजना विकसित करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भूखंड बेचने के बाद भी प्रमोटर की जिम्मेदारी बरकरार
प्राधिकरण ने अपने आदेश के माध्यम से स्पष्ट किया कि किसी परियोजना में भूखंड बेच देने भर से प्रमोटर की कानूनी जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जातीं। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, बिजली, पेयजल और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रमोटर का दायित्व है। इसके साथ ही परियोजना के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त करना भी जरूरी है।
आबंटियों के हितों की सुरक्षा पर जोर
CG-RERA का यह आदेश रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य अधूरे छोड़ने, परियोजना में अनावश्यक देरी करने या रेरा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

