UPI चार्ज पर मायावती का सरकार पर हमला, बोलीं- ‘पहले आदत डाली, अब जेब पर बोझ डाल रहे’; स्मार्ट स्कूल योजना पर भी उठाए सवाल
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने UPI लेनदेन पर लागू होने वाले नए शुल्क ढांचे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने पहले लोगों को UPI और डिजिटल भुगतान की आदत डाली और अब शुल्क की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका असर आम जनता के खर्च पर पड़ सकता है।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सरकार ने पहले UPI डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया और अब इस पर शुल्क लेने की नई व्यवस्था शुरू कर रही है। उनके मुताबिक, यह कदम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। उन्होंने कहा कि लोग इसे अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं और इसे चाहे कोई भी नाम दिया जाए, अंततः इसका असर आम लोगों के खर्च पर पड़ेगा।
2,000 रुपये से ज्यादा के कारोबारी UPI भुगतान पर 0.4% MDR
नए UPI शुल्क ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा कारोबारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया गया है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन तय की गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी।
सरकार के अनुसार, यह शुल्क सीधे UPI उपयोगकर्ताओं से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) लेनदेन किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा, जबकि 2,000 रुपये तक के कारोबारी भुगतान और छोटे कारोबारियों के दायरे में आने वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
महंगाई और आर्थिक तंगी का हवाला देकर मायावती ने दिया सुझाव
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने सरकार से कहा कि उसकी नीतियों में लाभ कमाने वाली व्यावसायिक सोच की बजाय जनकल्याण को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब जनता आर्थिक तंगी और दूसरी परेशानियों से जूझ रही हो, तब सरकार को उसकी चिंता करनी चाहिए। मायावती ने UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर भी इसी संदर्भ में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
14,500 स्मार्ट स्कूलों की घोषणा पर भी मायावती ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के लगभग 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने इस पहल को अच्छी बात बताया, लेकिन कहा कि बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने पक्की छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मायावती ने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल करीब 2 लाख रुपये के बजट में इन सभी बुनियादी व्यवस्थाओं को किस तरह पूरा किया जा सकेगा, इस पर सरकार को विचार करना चाहिए।


