उत्तराखंड

चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग आज से शुरू, शाम 3 बजे खुलेगी ऑनलाइन विंडो

देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर से सफर करने वाले श्रद्धालुओं के लिए टिकट बुकिंग आज से शुरू हो रही है। 16 अक्टूबर से 9 नवंबर के बीच यात्रा के लिए शुक्रवार को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की अधिकृत वेबसाइट पर टिकट बुक किए जा सकेंगे। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने यह जानकारी दी। बुकिंग की सुविधा दोपहर 3 बजे से उपलब्ध होगी।

सिर्फ अधिकृत वेबसाइट से होगी टिकट बुकिंग

यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकटों की बुकिंग केवल आईआरसीटीसी की अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से ही की जा सकेगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि टिकट लेने के लिए किसी दूसरे माध्यम का इस्तेमाल न करें।

फर्जी एजेंटों और वेबसाइट से रहें सावधान

हेलीकॉप्टर टिकट बुक करते समय यात्रियों को धोखाधड़ी से बचने की हिदायत दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि श्रद्धालु अनधिकृत व्यक्तियों, ट्रैवल एजेंटों, फर्जी वेबसाइटों या संदिग्ध लिंक के जरिए टिकट बुक न करें। टिकट बुकिंग के लिए केवल आधिकारिक माध्यम का ही इस्तेमाल करें।

कुंभ मेले की तैयारियां तय समय पर पूरी करने के निर्देश

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि चुनाव और जनगणना से जुड़े कामों के कारण कुंभ की तैयारियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी कार्यों की समयसीमा निर्धारित करने और एक साथ किए जा सकने वाले कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि चुनाव और जनगणना के कारण कुंभ के कार्यों के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता में कमी नहीं आनी चाहिए।

आदर्श संस्कृत ग्रामों को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

उत्तराखंड में आदर्श संस्कृत ग्रामों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की तीसरी बैठक हुई। इसमें संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास से जुड़े कई फैसले लिए गए।

मुख्य सचिव ने संस्कृत प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही संस्कृत के प्रचार के लिए ऑनलाइन शिक्षण सामग्री तैयार करने, जानकारी देने वाली छोटी वीडियो बनाने और मोबाइल ऐप का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए।