हरियाणा में नशामुक्ति केंद्रों की बदहाली पर कुमारी सैलजा का सरकार पर हमला, बोलीं- दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
सिरसा: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बढ़ते नशे और नशामुक्ति केंद्रों की बदहाल स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार नशामुक्त हरियाणा बनाने के दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट हैं। बेरोजगारी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और उपचार सुविधाओं की कमी युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन रही है। नशे के कारण परिवार प्रभावित हो रहे हैं और सामाजिक माहौल के साथ कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
पांच साल में 1.84 लाख युवाओं ने कराया उपचार
कुमारी सैलजा ने प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा के नशामुक्ति केंद्रों में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 1.84 लाख युवाओं ने उपचार कराया है। प्रदेश में कुल 134 पंजीकृत नशामुक्ति केंद्र हैं, लेकिन इनमें से केवल 26 सरकारी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक, प्रशिक्षित कर्मचारी, दवाइयां और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति प्रदेश की नशामुक्ति नीति और स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को उजागर करती है।
सैलजा ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि नशे की लत छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रहे युवाओं को भी पर्याप्त उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं, निजी नशामुक्ति केंद्रों में इलाज का भारी खर्च गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
सिर्फ पुलिस कार्रवाई से खत्म नहीं होगी नशे की समस्या
कांग्रेस सांसद ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। सैलजा के मुताबिक, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकार को उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
हर जिले में सरकारी नशामुक्ति सुविधाएं बढ़ाने की मांग
कुमारी सैलजा ने मांग की कि हरियाणा के प्रत्येक जिले में सरकारी नशामुक्ति सुविधाओं का विस्तार किया जाए। केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, मुफ्त दवाइयों, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने निजी नशामुक्ति केंद्रों की नियमित निगरानी करने की भी मांग उठाई, ताकि वहां उपचार की गुणवत्ता और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता पर नजर रखी जा सके।
सैलजा ने कहा कि सरकार को प्रचार और घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीन पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, हरियाणा के युवाओं को नशे से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

