काशी में 64 दिन बाद लौटी गंगा आरती की रौनक, दशाश्वमेध घाट पर फिर दिखा दिव्य नजारा
64 दिनों तक छत पर आयोजित हुई आरती
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट पर आरती के आयोजन की व्यवस्था बदलनी पड़ी थी। 17 अगस्त से गंगा सेवा निधि की ओर से यह आरती संस्था के कार्यालय की छत पर कराई जा रही थी। बाढ़ के पानी के कारण श्रद्धालु घाट के पारंपरिक मंच पर होने वाली आरती का नजारा नहीं देख पा रहे थे। अब जलस्तर में कमी आने के बाद आरती को दोबारा उसके मूल स्थान पर शुरू कर दिया गया है।
मूल स्थान पर आरती होते ही उमड़े श्रद्धालु
मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक विधि-विधान से गंगा आरती संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग मां गंगा की आराधना में शामिल हुए। काशी की पहचान मानी जाने वाली इस आरती के अपने पुराने स्थान पर लौटने से घाट पर एक बार फिर रौनक दिखाई देने लगी।
सामान्य स्तर से अब भी 10 से 15 फीट ऊपर गंगा
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पिछले 64 दिनों से कार्यालय की छत पर आरती आयोजित की जा रही थी। मंगलवार को इसे फिर से दशाश्वमेध घाट के पारंपरिक स्थान पर संपन्न कराया गया।
उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर अब भी सामान्य से करीब 10 से 15 फीट अधिक है। हालांकि, पक्के घाटों का आपसी संपर्क फिर से जुड़ गया है। आगामी पर्वों को देखते हुए घाटों की सफाई भी कराई जा रही है।
काशी में आस्था और परंपरा की लौटी रौनक
बाढ़ के कारण लंबे समय तक बदली व्यवस्था के बाद गंगा आरती का अपने मूल स्थान पर लौटना श्रद्धालुओं के लिए राहत और आस्था से जुड़ा खास अवसर है। दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक तरीके से आरती शुरू होने के साथ ही काशी की धार्मिक पहचान से जुड़ा यह भव्य आयोजन फिर अपने पुराने स्वरूप में नजर आने लगा है।

