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बिना मंजूरी नहीं मिलेगा स्टेम सेल इलाज, ऑटिज्म थेरेपी पर भी कड़े नियम; उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्टेम सेल थेरेपी के इस्तेमाल को लेकर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्टेम सेल थेरेपी को नियमित चिकित्सकीय उपचार के तौर पर केवल उन्हीं बीमारियों और स्थितियों में इस्तेमाल किया जाए, जिन्हें मंजूरी मिली हुई है। वहीं, ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल का इस्तेमाल केवल मंजूरी प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल तक सीमित रहेगा।

16 सितंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी हुई सलाह

स्वास्थ्य मंत्रालय की यह सलाह 16 सितंबर को उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की गई, जिन्होंने स्टेम सेल थेरेपी के नियमन के लिए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 को अपनाया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी के यश चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले में दिए गए फैसले के बाद उठाया गया है।

मंत्रालय की सलाह में स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से संबंधित मौजूदा नियमों को दोहराते हुए कहा गया है कि नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस में स्टैंडर्ड केयर के तौर पर स्टेम सेल थेरेपी केवल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूर सूची में शामिल बीमारियों या स्थितियों के लिए ही दी जा सकती है।

ऑटिज्म के इलाज में स्टेम सेल का इस्तेमाल सिर्फ क्लिनिकल ट्रायल तक

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के मामले में नियम और स्पष्ट किए गए हैं। सलाह के मुताबिक, ऑटिज्म के लिए किसी भी प्रकार की स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल उपचार के तौर पर केवल मंजूरी प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल में ही किया जा सकेगा।

यह व्यवस्था नेशनल गाइडलाइंस फॉर स्टेम सेल रिसर्च, 2017 के अनुरूप होगी। इन दिशानिर्देशों को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ने संयुक्त रूप से जारी किया था। इसके अलावा, समय-समय पर भारत सरकार की ओर से जारी अन्य लागू निर्देश भी प्रभावी रहेंगे।

सभी सरकारी और निजी संस्थानों तक पहुंचाने होंगे निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और लागू नियमों की जानकारी सभी राज्य और जिला नियामक प्राधिकरणों तक पहुंचाई जाए। साथ ही स्टेम सेल रिसर्च, उपचार, प्रचार या प्रशासन से जुड़े सरकारी और निजी क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स को भी इन निर्देशों से अवगत कराने को कहा गया है।

मंत्रालय ने नियमों का पालन नहीं करने के कानूनी और नियामकीय परिणामों की ओर भी ध्यान दिलाया है। संबंधित अधिकारियों और संस्थानों से स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से जुड़े प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

नियम तोड़ने पर पेशेवर कदाचार से लेकर पंजीकरण रद्द होने तक कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी के फैसले में कहा था कि कानूनी आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें आईएमसी रेगुलेशंस, 2002 के रेगुलेशन 7.22 के तहत पेशेवर कदाचार की कार्रवाई के साथ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 की धारा 32 और 40 के तहत कार्रवाई शामिल है। इन प्रावधानों में पंजीकरण रद्द करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

NMC ने भी दोहराई मंजूरी प्राप्त स्थितियों की शर्त

नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन ने 5 सितंबर की अपनी एडवाइजरी में भी कहा कि स्टेम सेल थेरेपी को स्टैंडर्ड क्लिनिकल केयर के रूप में केवल मंजूरी प्राप्त स्थितियों के लिए ही दिया जा सकता है।

NMC की एडवाइजरी के अनुसार, मंजूरी प्राप्त स्थितियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी देना, लिखना, उसका प्रचार करना या विज्ञापन करना पेशेवर कदाचार माना जाएगा।

कथित उल्लंघनों की जांच करेंगी राज्य मेडिकल काउंसिल

NMC ने राज्य मेडिकल काउंसिलों को उनके संज्ञान में आने वाले कथित उल्लंघनों की जांच करने की सलाह दी है। यदि उचित प्रक्रिया के बाद किसी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के खिलाफ पेशेवर कदाचार साबित होता है, तो लागू कानूनी और नियामकीय प्रावधानों के तहत उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।