गंडमूल नक्षत्र का रहस्य: जन्म के बाद 27 दिनों तक पिता-दर्शन क्यों माना जाता है वर्जित?
हिंदू ज्योतिष और परंपराओं में गंडमूल नक्षत्र को विशेष महत्व दिया गया है। जब किसी परिवार में बच्चे का जन्म होता है, तो खुशियों के साथ-साथ ग्रह-नक्षत्रों की गणना भी शुरू हो जाती है। इसी गणना में यदि जन्म गंडमूल नक्षत्र में बताया जाए, तो अक्सर परिवार के बुजुर्ग पिता को 27 दिनों तक नवजात का चेहरा न देखने की सलाह देते हैं। इस परंपरा के पीछे केवल आस्था ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय गणना और पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी मानी जाती हैं।
क्या होते हैं गंडमूल नक्षत्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं, जिनमें से 6 को गंडमूल नक्षत्र माना गया है। इनमें अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती शामिल हैं। मान्यता है कि जब एक राशि और नक्षत्र का अंत और दूसरे का आरंभ एक साथ होता है, यानी संधि काल में जन्म होता है, तो उस समय ग्रहों का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है। इसी प्रभाव को गंड दोष कहा जाता है।
पिता को बच्चे का चेहरा न दिखाने के पीछे की मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे का तेज और ऊर्जा विशेष मानी जाती है। ऐसी धारणा है कि यदि पिता तुरंत बच्चे का दर्शन कर ले, तो इससे पिता के स्वास्थ्य, मान-सम्मान या आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण पिता-दर्शन को कुछ समय के लिए वर्जित माना गया है।
27 दिनों का ज्योतिषीय आधार
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को 27 नक्षत्रों का एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 27 दिन लगते हैं। जन्म के 27वें दिन वही नक्षत्र दोबारा आता है, जिसमें बच्चे का जन्म हुआ था। इस दिन गंडमूल शांति या ‘सतैसा पूजा’ कराई जाती है। मान्यता है कि इस पूजा के बाद ग्रह शांत हो जाते हैं और पिता-पुत्र का मिलन शुभ फलदायी माना जाता है।
भावनात्मक और पारिवारिक दृष्टिकोण
पुराने समय में इस नियम को सावधानी के रूप में भी देखा जाता था। माना जाता है कि इससे परिवार अतिरिक्त सतर्कता बरतता है और बच्चे व पिता दोनों के लिए एक तरह का भावनात्मक और मानसिक सुरक्षा कवच बनता है।
क्या गंडमूल में जन्म अशुभ होता है?
आधुनिक दौर में कई लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि गंडमूल में जन्मा बच्चा अशुभ नहीं होता। इसे केवल अतिरिक्त सावधानी और ग्रह-शांति से जुड़ी परंपरा के रूप में देखा जाता है।
पूजा और ज्योतिषीय समाधान
गंडमूल दोष के निवारण के लिए 27वें दिन नक्षत्र शांति पूजा कराई जाती है। इसके साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पूजा पूर्ण होने के बाद शुभ मुहूर्त में पिता अपने बच्चे का दर्शन कर सकते हैं और उसे गोद में लेकर आशीर्वाद दे सकते हैं।
