मुखिया की मौत पर महिलाओं को चुकानी पड़ती है दर्दनाक कीमत, उंगलियां काटने की रही क्रूर परंपरा
दुनिया तेजी से आधुनिकता, शिक्षा और तकनीक की ओर बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद कई समाजों में आज भी ऐसी परंपराएं मौजूद हैं जो बेहद दर्दनाक और अमानवीय मानी जाती हैं। रीति-रिवाजों के नाम पर सदियों से चली आ रही कुछ प्रथाएं आज भी चर्चा का विषय बनती रहती हैं। ऐसी ही एक चौंकाने वाली परंपरा इंडोनेशिया के एक जनजातीय समाज से जुड़ी रही है, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।
मुखिया की मौत पर महिलाओं को झेलनी पड़ती थी सजा
इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र में रहने वाली दानी जनजाति के बीच एक समय बेहद कठोर परंपरा प्रचलित रही है। इस परंपरा के अनुसार यदि परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाती थी तो उसके शोक को व्यक्त करने के लिए परिवार की महिलाओं को अपने हाथों की कुछ उंगलियां कटवानी पड़ती थीं।
जनजातीय मान्यता के अनुसार ऐसा करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार के दुख को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाता है। हालांकि इस प्रथा को दुनिया की सबसे दर्दनाक और क्रूर परंपराओं में से एक माना गया है।
उंगलियां काटने की प्रक्रिया बेहद पीड़ादायक
इस परंपरा के दौरान महिलाओं की उंगलियों को पहले रस्सी से कसकर बांधा जाता था, ताकि खून का प्रवाह कम हो जाए। इसके बाद तेज धार वाले औजार, जैसे कुल्हाड़ी या अन्य उपकरण से उंगली का हिस्सा काट दिया जाता था।
यह प्रक्रिया बेहद पीड़ादायक होती थी और कई महिलाओं को जीवन भर इसके शारीरिक और मानसिक प्रभाव झेलने पड़ते थे। समय के साथ इस प्रथा की व्यापक आलोचना हुई और मानवाधिकारों के लिहाज से इसे अमानवीय माना गया।
कुरीतियों के खिलाफ बढ़ रही जागरूकता
दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी परंपराओं को खत्म करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक सुधार और कानूनों की मदद से कई समाजों में इन कुरीतियों को धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिशें भी की गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में बदलाव और जागरूकता ही ऐसी अमानवीय परंपराओं को खत्म करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
