कूनो-गांधीसागर के बाद चीतों को मिला तीसरा ठिकाना, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े गए 2 चीते; MP में संख्या 60 पहुंची
भोपाल: मध्य प्रदेश में चीतों के कुनबे को एक और नया ठिकाना मिल गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त किया। इसके साथ ही यह मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन गया है। इससे पहले कूनो और गांधीसागर में चीते मौजूद हैं।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में आयोजित वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने गिद्ध संख्या आकलन-2026 की रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या में 123 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। मुख्यमंत्री ने इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रभावी प्रयासों की सफलता बताया।
बुंदेली भाषा की किताब का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बुंदेली बोली में रची गई पुस्तक ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बुंदेलखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन इलाकों में अभयारण्य हैं और पर्यटक पहुंचते हैं, वहां पर्यटन से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इस साल अभयारण्यों से करीब 80 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ है, जिसमें से 20 करोड़ रुपये आसपास के ग्रामीणों को वितरित किए गए हैं।
ग्रामीणों को पर्यटन की कमाई में हिस्सा देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ग्रामीणों का हक है, क्योंकि वे वर्षों से अभयारण्यों के आसपास अपने गांव और घरों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे काश्तकारों के साथ ऐसे बड़े काश्तकार, जिनके पास अधिक भूमि है और जो किसी वजह से मौजूदा दायरे में लाभ से वंचित रह जाते हैं, उन्हें भी लाभ दिलाने के लिए मंत्रिमंडल में जरूरी संशोधन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी को भी लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
होम स्टे के लिए 2 से 3 लाख रुपये तक अनुदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बफर जोन के गांवों में होम स्टे विकसित किए जा रहे हैं। ग्रामीण अपने घरों में एक, दो या तीन कमरे बनाकर उन्हें पर्यटकों के लिए होम स्टे के रूप में किराए पर दे सकते हैं। ऐसे ग्रामीणों को सरकार की ओर से 2 से 3 लाख रुपये तक का अनुदान दिलाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे पर्यटन से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की जरूरतों और पर्यटन विकास के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना सरकार का प्रयास है। इसका उद्देश्य है कि अभयारण्य और पर्यटन से होने वाला लाभ सबसे पहले वहां रहने वाले ग्रामीणों तक पहुंचे।

वन क्षेत्रों में पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध उत्पादकों के लिए भी नया समय आया है। यह किसान कल्याण वर्ष है, इसलिए समितियों के माध्यम से उत्पादित दूध की उचित कीमत सुनिश्चित कर स्थायी लाभ दिलाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि खासकर वन क्षेत्रों में, जहां खेती की जमीन सीमित है, वहां पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश ने बड़ा लक्ष्य तय किया है।
110-115 साल बाद बुंदेलखंड में फिर गूंजेगी चीतों की दहाड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि कूनो और गांधीसागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व तीसरा ऐसा घर है, जहां बाघों की मौजूदगी के साथ चीतों को भी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा गिद्ध, बाघ, कछुए और घड़ियाल हैं। अब बुंदेलखंड की धरती चीते के नाम से भी पहचानी जाएगी।
उन्होंने बताया कि करीब 110 से 115 साल पहले मध्य प्रदेश में आखिरी बार चीता देखा गया था। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में चीता परियोजना शुरू हुई। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद आज चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है और हाल ही में पांच नए शावकों का भी आगमन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती आज वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रही है। सरकार का संकल्प है कि जंगल भी आबाद रहें और मानव जीवन भी प्रगति करे। यही ‘जियो और जीने दो’ का सच्चा अर्थ है।


