यूपी में चुनाव आयोग का ट्रांसफर-पोस्टिंग पर आदेश, गृह जिले में तैनाती नहीं; तीन साल पूरे करने वाले अधिकारियों का होगा तबादला
इन अधिकारियों पर लागू होंगे निर्देश
निर्वाचन आयोग के आदेश के मुताबिक, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) सहित चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े अधिकारियों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और उनसे वरिष्ठ स्तर के संबंधित अधिकारियों पर भी ये निर्देश लागू होंगे।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अधिकारी पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव के दौरान किसी विधानसभा क्षेत्र अथवा जिले में तैनात थे, उन्हें संबंधित मानकों के दायरे में आने पर उसी क्षेत्र में दोबारा चुनावी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
डीएम से लेकर तहसीलदार तक के अधिकारी दायरे में
चुनाव आयोग के निर्देश केवल निर्वाचन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं। इनमें जिलाधिकारी (DM) स्तर के चुनाव अधिकारी, एसडीएम, एडीएम, तहसीलदार और चुनाव कार्यों में सीधे लगाए गए अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी इन दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैनाती दी जाएगी।
इन नियमों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों की तैनाती को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना और चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों के निर्वहन में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
मतदान में लापरवाही पर छह अधिकारी निलंबित
इससे पहले सोमवार को निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दौरान कथित लापरवाही के मामले में छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया था। आयोग ने मतदान केंद्र संख्या 21 और 26 पर सामने आई गड़बड़ियों के मद्देनजर यह कार्रवाई की। इससे पहले दोनों मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
आयोग ने यह कदम आगरा मंडल के मंडलायुक्त की 25 अक्टूबर को प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर उठाया। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी भी हैं।
पर्यवेक्षण में चूक को आयोग ने गंभीरता से लिया
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए निर्देश में आयोग के सचिव सुमन कुमार दास ने मतदान केंद्रों के भीतर और आसपास प्रभावी निगरानी तथा उचित नियंत्रण सुनिश्चित नहीं किए जाने पर चिंता जताई। आयोग के अनुसार, पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में विफल रहे।
निर्देश में पर्यवेक्षी पदों पर तैनात अधिकारियों की इस लापरवाही को गंभीर मामला बताया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्तव्यों में ऐसी चूक को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

