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उत्तराखंड

14,500 फीट की ऊंचाई पर आदि कैलाश में पहली बार लगा लंबा जाम, बर्फ और बढ़ते वाहनों ने बढ़ाई यात्रियों की मुश्किल

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश में सोमवार को पहली बार जाम जैसी स्थिति देखने को मिली। करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण सड़क पर लंबी कतारें लग गईं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं और यात्रियों को कई घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा। ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में लगातार बढ़ता वाहन दबाव अब यातायात व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनता नजर आ रहा है।

सड़क पर तीन से चार फीट तक जमा थी बर्फ

आदि कैलाश क्षेत्र में पिछले दिनों हुई भारी बर्फबारी के बाद सड़क पर तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो गई थी। यातायात बहाल करने के लिए बर्फ हटाने का काम किया गया और सड़क से जमी बर्फ हटाकर वाहनों की आवाजाही शुरू कराई गई।

हालांकि, सड़क के दोनों किनारों पर जमा तीन से चार फीट ऊंचे बर्फ के ढेर पूरी तरह नहीं हटाए जा सके। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई। नतीजतन, आमने-सामने आने वाले वाहनों को एक-दूसरे को रास्ता देने में परेशानी होने लगी।

बढ़ते निजी वाहनों ने भी बढ़ाई परेशानी

जाम की वजह सिर्फ बर्फबारी नहीं है। आदि कैलाश जाने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ निजी वाहनों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है। ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट जैसे संवेदनशील हिस्सों में सड़क पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है।

ऐसे स्थानों पर जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं तो दोनों दिशाओं से आने वाले वाहनों को निकालना मुश्किल हो जाता है। बर्फबारी के बाद सड़क की चौड़ाई और कम होने से यह समस्या और गंभीर हो गई।

एक वाहन रुका तो पीछे लगती गई लंबी कतार

किसी एक स्थान पर वाहन के रुकते ही उसके पीछे आने वाले वाहनों की कतार बढ़ती चली गई। देखते ही देखते यही स्थिति सोमवार को लंबे जाम में बदल गई। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम का अचानक बदलना, भारी बर्फबारी और सड़क पर बर्फ जमना पहले से ही यातायात के लिए बड़ी चुनौती है। अब वाहनों की बढ़ती संख्या ने इन मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

सड़क सुधरी तो बढ़ने लगी यात्रियों की संख्या

आदि कैलाश करीब 14,500 फीट यानी 4,420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कुछ साल पहले तक दुर्गम पहाड़ी रास्ते और कठिन मौसम यहां यात्रा की प्रमुख बाधाएं माने जाते थे। सड़क में सुधार और कई हिस्सों में डामरीकरण के बाद यहां वाहनों की आवाजाही पहले के मुकाबले आसान हुई है।

सड़क बेहतर होने के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से आदि कैलाश पहुंचने लगे हैं। इससे इस मार्ग पर वाहनों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

2026 में अब तक 61,950 पर्यटक पहुंचे

आदि कैलाश का मार्ग चीन सीमा तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी अहम है। मार्ग में सुधार के बाद यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में 10,079 पर्यटक आदि कैलाश पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 हो गई, जबकि 2025 में 31,558 पर्यटक यहां पहुंचे। वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या 61,950 तक पहुंच चुकी है।

यात्रियों और वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच सड़क की सीमित चौड़ाई और बर्फबारी यातायात प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सोमवार को लगा जाम इसी बढ़ते दबाव का एक उदाहरण माना जा रहा है।