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58 साल में रिटायर हुए दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ा झटका! हरियाणा सरकार ने दोबारा नौकरी पर लौटने का रास्ता किया बंद

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त किए जा चुके दिव्यांग कर्मचारियों की दोबारा नौकरी पर वापसी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे कर्मचारियों को अब दोबारा सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा। वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और उपायुक्तों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

58 साल में रिटायर कर्मचारियों की नहीं होगी दोबारा जॉइनिंग

वित्त विभाग ने एडवोकेट जनरल की कानूनी सलाह और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर यह निर्णय लिया है। जारी निर्देशों के मुताबिक, जिन दिव्यांग कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर पहले ही सेवा से रिलीव किया जा चुका है, वे दोबारा नौकरी पर लौटने का दावा नहीं कर सकेंगे।

सरकार ने साफ किया है कि ऐसे कर्मचारियों को किसी भी परिस्थिति में वापस सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद पहले से सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं।

कोर्ट से राहत पाने वाले कर्मचारियों को मिली छूट

हालांकि, सरकार ने उन दिव्यांग कर्मचारियों को राहत दी है, जिन्हें हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से स्टे अथवा अंतरिम राहत मिली हुई है और जिन्हें अभी तक सेवा से रिलीव नहीं किया गया है।

निर्देशों के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को फिलहाल उनके पदों से नहीं हटाया जाएगा। साथ ही उनका वेतन भुगतान भी पहले की तरह जारी रहेगा। यानी अदालत से अंतरिम राहत प्राप्त कर अभी सेवा में बने हुए कर्मचारियों पर तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्ति की कार्रवाई नहीं होगी।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, हरियाणा सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए दिव्यांग कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इस फैसले से प्रभावित कई कर्मचारियों ने सरकार के निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी।

मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के बाद सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के मुताबिक, 3 फरवरी को जारी अधिसूचना के बाद जिन कर्मचारियों को सेवा से मुक्त किया जा चुका है, उन्हें दोबारा नौकरी पर नहीं रखा जाएगा।

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर सरकार का जोर

हरियाणा सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा सेवा में शामिल नहीं करने से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। इसी आधार पर सरकार ने पहले से रिटायर हो चुके दिव्यांग कर्मचारियों की री-जॉइनिंग पर रोक लगाने का फैसला लागू किया है।