पर्यावरण दिवस पर बीबीएयू में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाए गए 300 पौधे
लखनऊ : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास को लेकर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पर्यावरण विज्ञान विभाग और एनबीआरआई-ईआईएसीपी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था- ‘इंस्पायर्ड बाय नेचर: फॉर क्लाइमेट, फॉर अवर फ्यूचर’। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
प्रकृति को मां के समान बताया, संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन का आधार है और उसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित विकास और संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। कई वन्य प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी हैं और प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से क्षरण हो रहा है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाएं, प्रकृति के करीब रहें और संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, शोध और नवाचार के माध्यम से सतत विकास के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। पर्यावरण आधारित उद्यमिता आज रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं प्रस्तुत कर रही है।

पक्षियों पर मंडरा रहे खतरों को लेकर जताई चिंता
मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक डॉ. असद रहमानी ने जैव विविधता और पक्षी संरक्षण के मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग का असर पक्षियों की आबादी पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग 11 हजार पक्षी प्रजातियों में से करीब 48 प्रतिशत की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। जलवायु परिवर्तन, आवासों का नष्ट होना, शहरीकरण, कांच की ऊंची इमारतें और अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश जैसी गतिविधियां पक्षियों के अस्तित्व के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। उन्होंने पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनभागीदारी को आवश्यक बताया।
नदी संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. वेंकटेश दत्ता ने नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा हैं। जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वृक्षारोपण और सतत विकास लक्ष्यों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
माइक्रोप्लास्टिक को बताया बड़ा खतरा
सीएसआईआर-एनबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म प्लास्टिक कण जल, मिट्टी, वायु और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंच रहे हैं, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों को भी रेखांकित किया।
पर्यावरण जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रश्नोत्तरी, समूह आधारित इंटरैक्टिव खेल और पहेली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment) के तहत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की शपथ भी दिलाई गई।
इस अवसर पर प्रो. वेंकटेश दत्ता के मार्गदर्शन में तैयार ‘स्मॉलर रिवर रिस्टोरेशन गाइडबुक’ का भी विमोचन किया गया।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में लगाए गए 300 पौधे
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के बागवानी एवं सौंदर्यीकरण अनुभाग द्वारा चिल्ड्रेन पार्क में विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के लगभग 300 पौधे लगाए गए।
अभियान का संचालन प्रो. जी.सी. यादव, हार्टिकल्चर सलाहकार अमोद कुमार सिंह और उद्यान निरीक्षक डॉ. समीर दीक्षित के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
