किलों के बाहर क्यों बनाई जाती थी गहरी खाई? पानी, मगरमच्छ और जहरीले सांपों से दुश्मनों का रास्ता ऐसे होता था बंद
नई दिल्ली: भारत समेत दुनिया के कई प्राचीन किलों के चारों ओर बनी गहरी और चौड़ी खाइयां सिर्फ वास्तुकला का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि उस दौर की सबसे प्रभावी सैन्य सुरक्षा रणनीतियों में शामिल थीं। इन खाइयों का उद्देश्य केवल दुश्मनों को रोकना नहीं था, बल्कि किले को हर दिशा से सुरक्षित बनाना और हमले की कई रणनीतियों को विफल करना भी था।
दुश्मन की सीधी घुसपैठ रोकने का था सबसे बड़ा हथियार

किलों के बाहर बनाई गई गहरी खाई का सबसे प्रमुख उद्देश्य दुश्मन सेना को सीधे किले तक पहुंचने से रोकना था। खाई की वजह से घुड़सवार, हाथी या पैदल सैनिक मुख्य द्वार तक आसानी से नहीं पहुंच पाते थे। इससे किले के भीतर मौजूद सैनिकों को जवाबी कार्रवाई की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल जाता था।
सुरंग बनाकर हमला करने की चाल हो जाती थी नाकाम
प्राचीन युद्धों में कई बार दुश्मन सेना किले की दीवारों के नीचे सुरंग खोदकर अंदर घुसने या दीवार गिराने की कोशिश करती थी। लेकिन किले के चारों ओर पानी से भरी गहरी खाई होने के कारण ऐसी सुरंग बनाना बेहद कठिन हो जाता था। इससे दुश्मनों की यह रणनीति अक्सर विफल हो जाती थी।
हाथियों और भारी हथियारों का इस्तेमाल भी हो जाता था बेअसर
उस दौर में किले के विशाल दरवाजों को तोड़ने के लिए हाथियों और भारी लकड़ी के तनों जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, किले के बाहर मौजूद गहरी खाई इन हथियारों और हाथियों को मुख्य द्वार तक पहुंचने से रोक देती थी। इससे किले की सुरक्षा कई गुना मजबूत हो जाती थी।

पानी के साथ मगरमच्छ और जहरीले सांप भी बनते थे सुरक्षा कवच
कई किलों की खाइयों में पानी भरा रहता था और सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उनमें मगरमच्छ या जहरीले सांप छोड़े जाने का भी उल्लेख मिलता है। ऐसे में यदि कोई सैनिक तैरकर खाई पार करने की कोशिश करता, तो उसके लिए यह बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता था। इससे दुश्मन के लिए किले तक पहुंचना और भी कठिन हो जाता था।
ड्रॉब्रिज से होता था किले में प्रवेश
पानी से भरी खाई के ऊपर आने-जाने के लिए ड्रॉब्रिज यानी उठने वाले पुल का इस्तेमाल किया जाता था। यह मजबूत लकड़ी या लोहे का पुल होता था, जिसे सामान्य समय में खाई के ऊपर रखा जाता था। युद्ध या रात के समय इसे जंजीरों की मदद से ऊपर खींच लिया जाता था, जिससे किले का प्रवेश मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता था और दुश्मन अंदर नहीं पहुंच पाता था।

