होटल के कमरे में छोड़ा गया साबुन आखिर जाता कहां है? जानिए कैसे बनता है जरूरतमंदों के लिए मदद का बड़ा जरिया
नई दिल्ली: बड़े होटलों में मेहमानों की सुविधा के लिए साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट समेत रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजें उपलब्ध कराई जाती हैं। कई होटलों में साबुन और शैम्पू रोजाना बदले जाते हैं, जबकि कुछ जगहों पर ऐसा नहीं होता। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि मेहमानों के जाने के बाद आंशिक रूप से इस्तेमाल किए गए साबुन और अन्य उत्पादों का आखिर क्या किया जाता है।
आम धारणा यह है कि मेहमानों द्वारा इस्तेमाल किए गए या आधे बचे साबुन और अन्य उत्पादों को सीधे कूड़े में फेंक दिया जाता है, जबकि पूरी तरह पैक और बिना इस्तेमाल वाले उत्पाद अगले मेहमानों के लिए रख दिए जाते हैं। हालांकि, यह तस्वीर पूरी तरह ऐसी नहीं है।

रिपोर्ट में सामने आई अलग तस्वीर
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन उत्पादों को आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, वे जरूरतमंद लोगों के लिए स्वच्छता का महत्वपूर्ण साधन बन सकते हैं। ऐसे कई लोग हैं जो आर्थिक तंगी के कारण साबुन और अन्य स्वच्छता संबंधी उत्पाद खरीदने में सक्षम नहीं होते, जिससे उन्हें गंदगी और उससे जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2009 में कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने इस दिशा में अभियान शुरू किया था।
रिसाइक्लिंग के जरिए तैयार किए जाते हैं नए उत्पाद
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रतिदिन बड़ी संख्या में होटलों के कमरों से ऐसे उत्पाद निकलते हैं, जिनका दोबारा उपयोग संभव है। इस समस्या के समाधान के लिए दुनिया भर में कई संस्थाओं ने मिलकर एक अभियान चलाया, जिसके तहत आंशिक रूप से इस्तेमाल किए गए साबुनों को एकत्र कर उन्हें रिसाइक्लिंग प्रक्रिया के जरिए नए साबुन में बदला जाता है। इसी तरह अन्य उपयोगी उत्पादों को भी दोबारा तैयार किया जाता है।
इसके बाद इन रिसाइक्लिंग किए गए उत्पादों को विकासशील देशों में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस पहल का लाभ उन इलाकों में रहने वाले लोगों को भी मिलता है, जहां स्वच्छ पानी, साबुन और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की कमी है।

जरूरतमंदों तक पहुंचाने से पहले होती है पूरी जांच
स्थानीय स्तर पर कई गैर-सरकारी संगठन बड़े होटलों से प्रतिदिन बचे हुए उत्पाद एकत्र करते हैं। इन्हें सीधे वितरित नहीं किया जाता, बल्कि पहले रिसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस दौरान साबुन और अन्य उत्पादों को कीटाणुरहित किया जाता है तथा उनकी शुद्धता और गुणवत्ता की जांच भी की जाती है, ताकि उनका सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
अब भी कई जगह बर्बाद हो रहे हैं उपयोगी उत्पाद
हालांकि, रिसाइक्लिंग और पुन: उपयोग की यह व्यवस्था कई स्थानों पर अपनाई जा रही है, लेकिन अब भी ऐसे अनेक होटल हैं जहां आंशिक रूप से इस्तेमाल किए गए साबुन और अन्य उत्पादों को कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन वस्तुओं का सुरक्षित तरीके से दोबारा उपयोग संभव हो, उन्हें नष्ट करने के बजाय जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना अधिक उपयोगी और सामाजिक रूप से लाभकारी कदम हो सकता है।

