आयुर्वेद की ‘जलनेति क्रिया’ से मिल सकता है कई बीमारियों में फायदा, जानिए तरीका और लाभ
नई दिल्ली: आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने और कई बीमारियों से राहत दिलाने के लिए विभिन्न प्राकृतिक क्रियाओं का उल्लेख मिलता है। इनमें से एक प्रमुख अभ्यास ‘जलनेति’ माना जाता है, जिसे नियमित रूप से करने पर शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
नाक की सफाई से साइनस और सांस की समस्याओं में राहत
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार जलनेति क्रिया में नाक के जरिए गुनगुने और हल्के नमक मिले पानी से सफाई की जाती है। इस प्रक्रिया से साइनस की समस्या में राहत मिल सकती है, क्योंकि यह नाक मार्ग में जमा सूजन और अवरोध को कम करने में मदद करती है। इसके साथ ही अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में भी इसे सहायक बताया जाता है।
शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार
जलनेति को शरीर से विषैले तत्वों और बैक्टीरिया को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। माना जाता है कि यह नाक मार्ग को साफ रखने के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बेहतर बनाने में योगदान दे सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
जोड़ों और आर्थराइटिस में भी बताया गया लाभकारी
कुछ अध्ययनों और आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार जलनेति का नियमित अभ्यास योग और अन्य क्रियाओं के साथ करने पर रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी समस्याओं में भी राहत देखी गई है। यह जोड़ों की जकड़न, सूजन और दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर सकारात्मक असर
जलनेति को मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी बताया गया है। इसके नियमित अभ्यास से तनाव कम होने, एकाग्रता बढ़ने और स्मरण शक्ति बेहतर होने की बात कही जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह अभ्यास बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
आंखों की सेहत के लिए भी उपयोगी
कुछ मान्यताओं के अनुसार जलनेति से आंखों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसे करने से आंखों की नमी और आराम में सुधार होता है, जिससे दृष्टि संबंधित समस्याओं में राहत मिल सकती है।
कैसे की जाती है जलनेति क्रिया
जलनेति के लिए विशेष नेति पॉट का उपयोग किया जाता है, जिसमें हल्का गुनगुना नमक मिला पानी डाला जाता है। इस पानी को धीरे-धीरे एक नाक से डालकर दूसरे नाक से बाहर निकाला जाता है। यही प्रक्रिया दोनों नासिका छिद्रों के लिए दोहराई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभ्यास को सही तरीके और नियमित अभ्यास के साथ ही करना चाहिए।
