मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप खनिज संपदा से संवरेगा आदिवासी अंचलों का भविष्य, पांच नए छात्रावास-आश्रम भवनों को मिली मंजूरी
रायपुर। खनिज संपदा से समृद्ध रायगढ़ जिले में खनन से प्राप्त संसाधन, अब आदिवासी बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप डीएमएफ की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में पांच नए छात्रावास एवं आश्रम भवनों के निर्माण के लिए 7 करोड़ 84 लाख 43 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के सामने लंबे समय से गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाओं का अभाव एक बड़ी चुनौती रहा है। कई विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई प्रभावित होती है। नई परियोजनाओं के पूरा होने से इन चुनौतियों का समाधान होगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधायुक्त तथा अध्ययन के अनुकूल वातावरण मिल सकेगा।
डीएमएफ की शासी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार विकासखंड लैलूंगा के बगुडेगा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास के लिए 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी प्रकार लैलूंगा के केशला स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास भवन निर्माण के लिए भी इतनी ही राशि मंजूर की गई है। विकासखंड घरघोड़ा के नवापारा टेंडा क्रमांक-02 स्थित आदिवासी बालक छात्रावास में नवीन भवन निर्माण हेतु 1 करोड़ 52 लाख 97 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

विकासखंड खरसिया के बड़े डूमरपाली में आदिवासी कन्या आश्रम भवन के निर्माण के लिए 1 करोड़ 62 लाख 76 हजार रुपये तथा विकासखंड तमनार के गोढ़ी में आदिवासी कन्या आश्रम भवन निर्माण के लिए भी 1 करोड़ 62 लाख 76 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। इन सभी परियोजनाओं के लिए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन ने छात्रावास एवं आश्रमों के समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है।

