समान अवसर और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर ‘एक भारत आंदोलन’ ने राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री समेत चार संवैधानिक पदों को भेजा ज्ञापन
लखनऊ: समान अवसर, शिक्षा सुधार, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों को लेकर ‘एक भारत आंदोलन’ (EBM) के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया। लखनऊ स्थित प्रधान डाकघर चौक से भेजे गए इस ज्ञापन में विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने और लिखित जवाब उपलब्ध कराने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा, निष्पक्ष एवं पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने की मांग उठाई।

‘संविधान की भावना के अनुरूप चल रहा है आंदोलन’
आंदोलन के प्रमुख सदस्य अभिषेक त्रिपाठी ने कहा कि यह किसी जाति, धर्म, वर्ग या समुदाय के विरोध का अभियान नहीं है। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य संविधान की भावना के अनुरूप समानता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और जनजागरण पर आधारित पहल बताया।
संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य अभिषेक मिश्रा ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। वहीं अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण एवं बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि इन्हीं संवैधानिक अधिकारों के तहत संगठन देशभर में जनजागरण अभियान चला रहा है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रख रहा है।

लिखित जवाब देने की भी उठाई मांग
ज्ञापन में संबंधित संवैधानिक प्राधिकारों से मांग की गई है कि प्रस्तुत सुझावों और मांगों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही इस संबंध में लिखित उत्तर उपलब्ध कराया जाए, ताकि नागरिकों को सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के सदस्य गौरव शुक्ला, अभिनय तिवारी और सागर श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य ‘एक भारत, समान अधिकार’ की भावना को मजबूत करते हुए संविधान के मूल आदर्शों के अनुरूप न्यायपूर्ण, समरस और अवसर-समान भारत के निर्माण में सकारात्मक योगदान देना है।

