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सावन के आखिरी सोमवार मंदिर जा रहे हैं? जलाभिषेक से परिक्रमा तक, पूजा से पहले जान लें ये जरूरी नियम

नई दिल्ली: सावन का आखिरी सोमवार इस बार 24 अगस्त को पड़ रहा है। भगवान शिव को समर्पित इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन आयुष्मान और प्रीति योग का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में अगर आप भी आखिरी सावन सोमवार को मंदिर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा सामग्री के साथ मंदिर की परंपराओं और कुछ जरूरी नियमों की जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंदिर जाने से पहले ऐसे करें तैयारी

सावन सोमवार को शिव मंदिर जाने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में पूजा के लिए शरीर के साथ मन की शुद्धता को भी जरूरी माना गया है। मंदिर पहुंचने के बाद जूते-चप्पल बाहर उतारकर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए।

मंदिर में प्रवेश के समय करें मंत्र जाप

मंदिर में प्रवेश करते समय ॐ नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भक्त का मन भगवान शिव की आराधना में एकाग्र होता है। इसके बाद भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी जी के दर्शन करने की परंपरा बताई गई है।

शिवलिंग पर इस क्रम से करें जलाभिषेक

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए साफ पात्र में जल लेकर जाना शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक के साथ की जाती है। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अर्पित किया जाता है। पंचामृत अर्पित करने के बाद बेलपत्र समेत अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।

बेलपत्र चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र साफ और साबुत होना चाहिए। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। पूजा में कटे-फटे या खराब बेलपत्र का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है।

शिवलिंग पर इन चीजों को न चढ़ाएं

सावन सोमवार की पूजा में कुछ वस्तुओं को शिवलिंग पर अर्पित नहीं करने की धार्मिक मान्यता है। तुलसी, हल्दी और सिंदूर को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। इसलिए मंदिर के लिए पूजा की थाली तैयार करते समय इन वस्तुओं को शामिल नहीं करना चाहिए।

शिवलिंग की परिक्रमा में जलाधारी का रखें ध्यान

शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जलाधारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग से निकलने वाले जल के मार्ग को लांघना उचित नहीं माना जाता। इसलिए परिक्रमा करते समय जलाधारी तक जाकर वहीं से वापस लौटने की परंपरा बताई गई है।