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किचन में बड़ा वास्तु दोष: गैस चूल्हा और सिंक पास होने से बिगड़ सकता है अग्नि-जल संतुलन, जानिए प्रभाव और उपाय

नई दिल्ली: प्राचीन वास्तु शास्त्र में रसोई घर को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, जहां पंचतत्वों का संतुलन घर की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा होता है। ऐसे में आधुनिक मॉड्यूलर किचन के बढ़ते चलन के बीच एक सामान्य डिजाइन गलती को बड़ा वास्तु दोष माना जा रहा है, जिसमें गैस चूल्हा और पानी का सिंक एक ही स्लैब पर पास-पास बनाए जाते हैं।

अग्नि और जल तत्व का टकराव क्यों माना जाता है दोष
वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व गैस चूल्हा करता है, जो ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसका स्थान सामान्यतः दक्षिण-पूर्व दिशा को शुभ बताया गया है। वहीं जल तत्व का प्रतिनिधित्व सिंक या नल करता है, जिसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना उचित माना जाता है।
जब ये दोनों विरोधी तत्व एक-दूसरे के बेहद करीब रखे जाते हैं तो माना जाता है कि इनके बीच ऊर्जा असंतुलन उत्पन्न होता है, जिससे वास्तु चक्र प्रभावित होता है।

वास्तु के अनुसार क्या हो सकते हैं नकारात्मक प्रभाव
वास्तु मान्यताओं के अनुसार अग्नि और जल के टकराव से घर के वातावरण पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं। पहला प्रभाव आर्थिक असंतुलन से जोड़ा जाता है, जिसमें आय के साथ अनावश्यक खर्च बढ़ने की संभावना बताई जाती है।
दूसरा प्रभाव पारिवारिक वातावरण पर पड़ सकता है, जहां तनाव, चिड़चिड़ापन और आपसी मतभेद बढ़ने की आशंका मानी जाती है।
तीसरा प्रभाव स्वास्थ्य से संबंधित माना जाता है, जिसमें पाचन तंत्र, मानसिक तनाव और शरीर की ऊर्जा पर नकारात्मक असर का उल्लेख किया जाता है।

बिना तोड़फोड़ के बताए गए वास्तु उपाय
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि किचन में बदलाव संभव न हो तो कुछ सरल उपाय अपनाकर इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
चूल्हे और सिंक के बीच लकड़ी का छोटा पार्टिशन रखने की सलाह दी जाती है, जिसे दोनों तत्वों के बीच संतुलन का माध्यम माना जाता है।
इसके अलावा बीच में छोटे हरे पौधे जैसे मनी प्लांट या बांस रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।
कुछ मामलों में तांबे की वस्तु या क्रिस्टल रखने को भी ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में सहायक बताया गया है।