छत्तीसगढ़

वन अधिकार पत्रधारकों के भूमि सीमा संबंधी विवादों का अब होगा स्थायी समाधान

रायपुर। वन अधिकार पत्रधारकों को वन अधिकार पत्र प्राप्त होने के बाद, भूमि के कब्जे एवं सीमांकन को लेकर हो रहे विवादों का शीघ्र ही समाधान होने जा रहा है। इस संबंध में आदिम जाति तथा अनुसचित जाति विकास विभाग द्वारा अभिनव पहल की गई है। विदित हो कि माननीय विभागीय मंत्री श्री रामविचार नेताम द्वारा भी पूर्व में विभागीय समीक्षा बैठक में वन अधिकार पत्रधारकों के भूमिसीमा संबंधी विवादों को लेकर ठोस कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा एवं आयुक्त श्री डी.राहुल वेंकट द्वारा संबंधित शाखा अधिकारियों के साथ बैठक लेकर वन अधिकार पत्रधारकों के भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों का किस प्रकार हल किया जा सकता है, इस पर गहन मंथन किया गया एवं अंतिम मसौदा तैयार किया गया।

आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग श्री डी.राहुल वेंकट द्वारा वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने तथा वन अधिकार पत्रधारियों को अनावश्यक विवादों एवं कठिनाइयों से राहत प्रदान करने के उद्देश्य से समस्त सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास (रायपुर, दुर्ग एवं बेमेतरा को छोड़कर) एवं जिला कलेक्टर्स को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत आगामी व्यक्तिगत वन अधिकार के स्वीकृत प्रकरणों में वन अधिकार पत्रों के पृष्ठ भाग में अंकित नजरी नक्शे में मान्य वनभूमि की स्पष्ट चौहद्दी के साथ प्रत्येक कोने के भू-निर्देशांक (ळमव ब्ववतकपदंजम दृ स्ंजपजनकम/अक्षांश – स्वदहपजनकम देशांतर) अंकित किए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों राजस्व एवं वन विभाग के अभिलेखों में भी (ऑफलाइन/ऑनलाइन) इन भू-निर्देशांकों को दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे भूमि की वास्तविक पहचान सुनिश्चित होगी तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में उसका त्वरित एवं प्रभावी निराकरण किया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि वन अधिकार पत्र वितरण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। राज्य में अब तक 4,83,500 से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र, 48,200 से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र एवं 4400 से अधिक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार वितरित किए गए हैं।

पहले की व्यवस्था अंतर्गत जिला स्तरीय समिति द्वारा व्यक्तिगत वन अधिकार के स्वीकृत दावों में से जारी किए जाने वाले व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों के पृष्ठ भाग में नजरी नक्शा अंकित किया जाता है, जिसमें वन अधिकार पत्र धारक की मान्य वनभूमि की चौहददी में स्थित खाताधारकों की जानकारी अंकित होती है, परन्तु कई मामलों में वन अधिकार पत्रों में अंकित भूमि की चौहददी/सीमाएं स्पष्ट नहीं होने अथवा सही प्रकार से सीमांकन नहीं होने के कारण आपसी विवाद उत्पन्न होते हैं, जिससे हितग्राहियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब वन अधिकार पत्रों में नजरी नक्शे में प्रत्येक कोने का भू-निर्देशांक दर्ज किया जाएगा।

निश्चित ही यह व्यवस्था वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत हितग्राहियों के अधिकारों की सुरक्षा एवं पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।